(स्व.) श्रीमती कौशल्या देवी अग्रवाल
श्रीमती कौशल्या देवी, राणी सती दादी को बहुत मानती थीं और गहरी भक्ति करती थीं। वह प्रतिदिन मंदिर जाती थीं चाहे मौसम कैसा भी हो। आँधी हो, तूफान हो या रास्ते में पानी भरा हो, उनका यह नियम कभी नहीं टूटा।
गाय को रोटी दिए बिना वे खुद खाना नहीं खाती थीं।
वह हमारे जीवन में एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं और आज भी निभा रही हैं। वह शारीरिक रूप से हमारे साथ नहीं हैं, पर ऐसा कभी नहीं लगता कि वह हमारे बीच नहीं हैं। हमें पूरा विश्वास है कि हमारे हर काम उनकी आशीर्वाद से ही पूरे होते हैं।
श्रीमती कौशल्या देवी बहुत ही मिलनसार और खुशमिजाज थीं। वह दूसरों के दुख को अपना समझती थीं। हमने जीवन के अधिकतर मूल्य उनसे ही सीखे हैं।
वह हमेशा सबके लिए अच्छा सोचती थीं और कभी किसी के लिए बुरा नहीं चाहा। उनका स्वभाव इतना शांत था कि उन्होंने कभी किसी से झगड़ा नहीं किया।
उन्हें दिखावा बिल्कुल पसंद नहीं था। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन सादगी से जिया।
बहुत संघर्षों के बीच उन्होंने अपने बच्चों का पालन-पोषण किया। पूरे परिवार का उनसे गहरा जुड़ाव था। वह हर सदस्य के दुख-दर्द को अपना समझकर सहानुभूति देती थीं।
वह भले ही लौकिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, किंतु उनके द्वारा दिए गए मूल्य और संस्कार इस तरह हमारे भीतर रच-बस गए हैं कि कभी भी यह अनुभव नहीं होता कि वह हमारे साथ नहीं हैं।