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श्री राणी सती दादी

श्री राणी सती दादी

त्याग, शक्ति और भक्ति की जीवंत प्रतीक

श्री राम दरबार / श्री राधा कृष्ण दरबार

श्री राम दरबार / श्री राधा कृष्ण दरबार

धर्म, प्रेम और मर्यादा की जीवंत झलक / प्रेम और भक्ति का शांति प्रतीक

श्री खाटू श्यामजी

श्री खाटू श्यामजी

कलयुग के साक्षात् भगवान

श्री सालासर बालाजी

श्री सालासर बालाजी

आस्था, चमत्कार और भक्ति के प्रतीक

श्री शिव परिवार

श्री शिव परिवार

शक्ति और शांति का सनातन संगम

तीर्थधाम :

पंचदेव मंदिर एवं प्रेम कुटीर

का हो रहा है निर्माण दक्षिण गुजरात और
संघ प्रदेश दानह तथा दमन में।

तीर्थधाम : पंचदेव मंदिर एवं प्रेम कुटीर
5 देवों का संगम

एक अद्वितीय और भव्य मंदिर का निर्माण होने जा रहा है। यह मंदिर उन भक्तों के लिए एक दिव्य आस्था स्थल होगा, जो आध्यात्मिक शक्ति, संतुलन और आत्मज्ञान की खोज में हैं। मंदिर परिसर को इस प्रकार से निर्मित किया जाएगा कि वहाँ ध्यान और प्रार्थना आयोजनों के लिए एक शांत और प्रेरणादायक वातावरण मिले।

प्रेम कुटीर
स्नेह और प्रेम से ओत-प्रोत

प्रेम कुटीर, जिसका शाब्दिक अर्थ ही स्नेहल भावना का अहसास कराता है, ऐसा संकुल तीर्थधाम : पंचदेव मंदिर एवं प्रेम कुटीर में बनाया जाएगा। यहाँ हमारे धर्म समाज के बड़े बुजुर्गों के लिए समय-समय पर उनके परिजनों की आवश्यकता अनुसार अल्पकालीन आवास की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जहाँ रहने, खाने और चिकित्सकीय देखभाल की व्यवस्था होगी। ऐसी संकल्पना के साथ प्रेम कुटीर का निर्माण सुसज्जित आवास के साथ किया जाएगा, जहाँ भागवत भाव का आभास होगा।

तीर्थधाम : पंचदेव मंदिर एवं प्रेम कुटीर

हमारी परिकल्पना - एक अलौकिक सनातन विश्वविद्यालय स्वरूप केंद्र

हमारी परिकल्पना

तीर्थधाम : पंचदेव मंदिर एवं प्रेम कुटीर का निर्माण हमारे क्षेत्र के सनातन धर्म प्रेमियों, उद्योगपतियों एवं गौसेवक श्री सूर्य प्रकाश जी अग्रवाल एवं उनके साथियों की संकल्पना से प्रारंभ हुआ। कौशल्या देवी अग्रवाल चैरिटेबल ट्रस्ट ने लगभग रुपए 5 करोड़ मूल्य की भूमि दान कर इस पावन योजना का शुभारंभ किया।

गौसेवा और भक्ति का संगम

मंदिर परिसर में एक भव्य गौशाला का निर्माण किया जाएगा। यहाँ गौसेवा के साथ-साथ गाय का दूध एवं उससे निर्मित सामग्री का उपयोग केवल मंदिर के धार्मिक कार्यों में ही होगा।

हमारा उद्देश्य

यह मंदिर केवल पंचदेव भगवान की आस्था का केंद्र ही नहीं होगा, बल्कि दक्षिण गुजरात, वापी, दमन और सिलवासा क्षेत्र में सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को जीवंत रखने वाला एक अलौकिक सनातन विश्वविद्यालय स्वरूप केंद्र बनेगा।

आगामी कार्यक्रम

10-16 दिसम्बर, 2025
पद्मविभूषित परम पूज्य संत श्री रामभद्राचार्य जी महाराज द्वारा कथा वाचन
12 दिसम्बर, 2025
मंदिर की आधारशिला पूज्य संत श्री रामभद्राचार्य जी महाराज के करकमलों से रखी जाएगी

निवास सुविधाएँ

प्रारंभिक चरण में 10 सुसज्जित कक्ष, साधु-संतों एवं धर्मप्रेमियों के निवास हेतु

प्रेम कुटीर

80 सुसज्जित कक्ष वरिष्ठ परिजनों के लिए आपातकालीन अवकाश गृह की व्यवस्था।

सेवा व्यवस्था

सात्विक भोजन, चिकित्सा और देखभाल की समुचित व्यवस्था (व्यावसायिक उपयोग पूर्णतः वर्जित)

आपकी सहभागिता

मंदिर निर्माण हेतु लगभग 4 लाख ईंटों की आवश्यकता है

4,00,000 ईंटों की आवश्यकता
₹ 1100 प्रति ईंट

हर सनातन प्रेमी इस पावन कार्य में अपनी आस्था की ईंट जोड़कर योगदान दे सकता है।

भविष्य की दिशा

यह केवल एक संक्षिप्त परिकल्पना है। पंचदेव के आशीर्वाद स्वरूप इस तीर्थ धाम में आगे अनेक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रवृत्तियों का निरंतर विस्तार होता रहेगा।

सभी भक्तजन सादर आमंत्रित हैं।

पद्मविभूषित जगद्गुरु संत श्री रामभद्राचार्य जी द्वारा
पंचदेव कथा

पद्मविभूषित जगद्गुरु संत
श्री रामभद्राचार्य जी द्वारा

बुधवार, 10 दिसंबर, 2025 से - मंगलवार, 16 दिसंबर, 2025 तक
दोपहर 3:00 से 5:00 बजे तक
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जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी
पद्मविभूषित जगद्गुरु संत श्री रामभद्राचार्य जी
धर्माचार्य, विद्वान, समाजसेवी
भारतवर्ष संतों, महात्माओं और धर्माचार्यों की पावन भूमि रही है। यहाँ अनेक महान संतों ने जन्म लेकर समाज को आध्यात्मिक मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। इन्हीं संतों में एक अत्यंत विशिष्ट स्थान जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी का है, जो दृष्टिहीन होते हुए भी अद्वितीय विद्वान, वक्ता, लेखक, कवि, धर्माचार्य और समाजसेवी हैं। वे न केवल धार्मिक जगत में प्रसिद्ध हैं, बल्कि शिक्षा, साहित्य और दिव्यांग जनों के उत्थान में भी उनका योगदान अतुलनीय है।
जन्म और बचपन
जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी का जन्म 14 जनवरी 1950 को उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के शांडीखुर्द गाँव में हुआ था। उनका बचपन का नाम गिरिधर मिश्र था। मात्र दो महीने की आयु में एक चिकित्सा त्रुटि के कारण उन्होंने अपनी आँखों की रोशनी सदा के लिए खो दी। परंतु इस शारीरिक दुर्बलता ने उनके मनोबल को कभी कमज़ोर नहीं किया। गिरिधर ने अपनी विलक्षण स्मरण शक्ति के बल पर बाल्यकाल में ही रामचरितमानस, भगवद्गीता, वेद, उपनिषद और पुराणों के श्लोकों को कंठस्थ कर लिया था।
शिक्षा और विद्वता
दृष्टिहीन होने के बावजूद गिरिधर जी ने कभी ब्रेल लिपि का सहारा नहीं लिया। उन्होंने श्रवण और स्मृति के बल पर ही अध्ययन किया और वाराणसी हिंदू विश्वविद्यालय से संस्कृत में शास्त्री और आचार्य की उपाधियाँ प्राप्त कीं। उन्होंने 20 से अधिक भाषाओं में पारंगतता प्राप्त की है, जिनमें संस्कृत, हिंदी, अवधी, मैथिली, उर्दू, पालि, अंग्रेज़ी आदि प्रमुख हैं। उनकी विद्वता का प्रमाण उनके द्वारा रचित 100 से अधिक ग्रंथों और पुस्तकों से मिलता है। वे एक उत्कृष्ट कवि, नाटककार, और आलोचक हैं। उन्होंने रामचरितमानस पर हिंदी और संस्कृत में टीकाएँ लिखीं, जो साहित्यिक जगत में अत्यंत प्रतिष्ठित मानी जाती हैं।
आध्यात्मिक नेतृत्व
सन 1988 में उन्हें जगद्गुरु रामानंदाचार्य के रूप में नियुक्त किया गया। यह पद रामानंद सम्प्रदाय के चार पीठों में से एक का सर्वोच्च स्थान होता है। इस पद के साथ वे आध्यात्मिक रूप से लाखों अनुयायियों के गुरु बन गए। वे देश-विदेश में रामकथा, श्रीमद्भागवत कथा, गीता प्रवचन आदि के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान का प्रसार करते हैं। उनकी वाणी में अद्भुत ओज और सरलता होती है, जिससे आम जनमानस भी गूढ़ आध्यात्मिक विषयों को समझ पाता है। उनका उद्देश्य है – “राम नाम के प्रचार से विश्व को शांत, समरस और धर्ममय बनाना।”
दिव्यांग विश्वविद्यालय
रामभद्राचार्य जी का सबसे प्रेरणादायक कार्य “जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय” की स्थापना है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना 2 जुलाई 2001 को चित्रकूट में की गई थी। यह विश्व का पहला ऐसा विश्वविद्यालय है जो केवल दिव्यांग छात्रों को शिक्षा प्रदान करता है। इस विश्वविद्यालय में दृष्टिहीन, मूक-बधिर, चलने-फिरने में असमर्थ और अन्य रूप से दिव्यांग छात्र-छात्राओं को स्नातक से लेकर शोध तक की शिक्षा दी जाती है। यहाँ तकनीकी, साहित्यिक, सामाजिक विज्ञान, शिक्षाशास्त्र जैसे विषयों में कोर्स उपलब्ध हैं। इसके कुलाधिपति स्वयं रामभद्राचार्य जी हैं।
साहित्य और रचनाएँ
रामभद्राचार्य जी ने विविध भाषाओं में अत्यंत उच्च कोटि के साहित्य की रचना की है। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं: श्रीरामचरितमानस का तुलनात्मक भाष्य (संस्कृत और हिंदी में), गीतारामायण, रामभावेश्वरी, भावार्थ रामायण, श्रीरामस्तव महाकाव्य, गीतावली भाष्य, कविता कौमुदी आदि। उनके साहित्य में गहराई, भक्ति, दर्शन और रस की पूर्णता होती है। वे छंदशास्त्र, अलंकार, व्याकरण और दर्शन शास्त्र के उच्च कोटि के ज्ञाता हैं।
सम्मान और पुरस्कार
रामभद्राचार्य जी को उनके योगदान के लिए अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिनमें भारत सरकार द्वारा प्रदत्त पद्मविभूषण (2015), साहित्य वाचस्पति सम्मान, महामहोपाध्याय की उपाधि, कविराज, धर्मचक्रवर्ती, विद्यावारिधि आदि अनेक मानद उपाधियाँ प्रमुख हैं।
प्रेरणा स्रोत
रामभद्राचार्य जी उन लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं जो किसी प्रकार की शारीरिक कमी के कारण अपने जीवन को निराशा से भर लेते हैं। उन्होंने सिद्ध कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति प्रबल हो, तो कोई भी शारीरिक दुर्बलता हमें रोक नहीं सकती। वे जीवन के हर क्षेत्र में सफल हुए — एक दर्शनशास्त्री, प्रवचनकार, विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, कवि, लेखक, और सबसे बढ़कर एक मानवता के सेवक।
विरासत और प्रभाव
जगद्गुरु रामभद्राचार्य न केवल एक संत हैं, बल्कि वे एक युगपुरुष हैं। उन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि दिव्यांगता बाधा नहीं, प्रेरणा बन सकती है। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि कठिनाइयों में भी आत्मबल, भक्ति और ज्ञान के सहारे समाज को दिशा दी जा सकती है। उनका जीवन, व्यक्तित्व और कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। वे सच्चे अर्थों में “अंधकार में दीपक” हैं।

विशेष आयोजन

भूमि पूजन एवं सांस्कृतिक संध्या

भूमि पूजन एवं

भजन संध्या

शुक्रवार, 12 दिसंबर, 2025 शाम 6:00 बजे

सामूहिक

महाप्रसाद

बुधवार, 10 दिसंबर, 2025 से,
मंगलवार, 16 दिसंबर, 2025 तक,
रोजाना शाम 7:00 बजे

कलाकार गण

संजय मित्तल जी
संजय मित्तल जी
गायक
अंजलि द्विवेदी जी
अंजलि द्विवेदी जी
गायिका
ऋतु शर्मा जी
ऋतु शर्मा जी
गायिका
विशाल रामावत जी
विशाल रामावत जी
मंच संचालक
Address QR
सर्वे नंबर 877, अंबिका पार्क के सामने, पोस्ट लवाछा,
तहसील वापी, जिला वलसाड, गुजरात – 396193
सहयोग राशि ₹ 1100/- प्रति ईंट
₹1100 ₹1100 ₹1100 ₹1100 ₹1100 ₹1100 ₹1100 ₹1100 ₹1100 ₹1100 ₹1100
भविष्य तीर्थधाम : पंचदेव मंदिर एवं प्रेम कुटीर निर्माण के इस महायज्ञ में अधिकाधिक ईंटों का योगदान देकर पुण्य के भागी बनें तथा अपने परिचितों को भी इस पुण्य कार्य हेतु प्रेरित करें।
सहयोग हेतु कृपया संपर्क करें
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