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पंचदेव मंदिर - एक पवित्र धाम

पाँच परम पूजनीय देवताओं का दिव्य निवास - जहां आस्था, भक्ति और चमत्कार का संगम होता है। खाटू श्याम, सालासर हनुमान, राणी सती दादी, राम दरबार और श्री शिव परिवार की कृपा से भक्तों को आत्मिक शांति और दिव्य अनुभव प्राप्त होता है।

पंचदेव मंदिर का महत्व और विशेषता

पंचदेव मंदिर एक प्रतिष्ठित हिंदू मंदिर है, जो पाँच परम पूजनीय देवताओं को समर्पित है। यह मंदिर हिंदू धर्म की समृद्ध परंपरा और आध्यात्मिक विरासत का अनूठा प्रतीक है। लवाछा, वापी में स्थित यह पवित्र स्थान श्री सूर्य प्रकाश अग्रवाल जी और उनके परिवार के अथक प्रयासों से स्थापित किया गया है।

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ पाँच अलग-अलग देवताओं की एक साथ उपासना होती है, जो भक्तों को संपूर्ण आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है। यहाँ विराजमान पाँच देवता हैं:

इस पवित्र स्थान पर आने वाले भक्तजन न केवल दर्शन का लाभ उठाते हैं, बल्कि जीवन की सभी समस्याओं का समाधान भी पाते हैं। पंचदेव की उपासना से भक्तों को शांति, समृद्धि, स्वास्थ्य, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक केंद्र भी है जहां विभिन्न त्योहार, भजन संध्या, और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। KDACT ट्रस्ट के तत्वावधान में संचालित यह मंदिर समाज सेवा और आध्यात्मिक जागरूकता का केंद्र है।

खाटू श्याम जी
राणी सती दादी

श्री राणी सती दादी - शक्ति और सतीत्व की देवी

श्री राणी सती दादी सतीत्व, पवित्रता और नारी शक्ति की प्रतीक हैं। राजस्थान के झुंझुनू जिले में स्थित इनका मुख्य मंदिर करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है। राणी सती दादी का वास्तविक नाम नारायणी देवी था।

इनके पति तन धन दास अग्रवाल एक व्यापारी थे। जब वे व्यापार के लिए दिल्ली गए तो वहाँ डकैतों ने उनकी हत्या कर दी। जब यह दुखद समाचार घर पहुंचा तो नारायणी देवी ने अपने पति के साथ सती होने का निर्णय लिया।

सती होते समय उन्होंने अपने भक्तों को वरदान दिया कि जो भी सच्चे मन से उनकी पूजा करेगा, उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी, परिवार में सुख-शांति आएगी और धन-संपत्ति की वृद्धि होगी

राणी सती दादी की पूजा विशेष रूप से महिलाओं द्वारा की जाती है। वे अपने पति की लंबी आयु, संतान की प्राप्ति, और पारिवारिक सुख के लिए दादी जी से प्रार्थना करती हैं। यहाँ चुनरी, सिंदूर, मिठाई और फूल चढ़ाए जाते हैं।

"माता राणी सती दादी सभी भक्तों की रक्षा करती हैं और उनके घर में सुख-समृद्धि लाती हैं"
राम दरबार

श्री राम दरबार / श्री राधा कृष्ण दरबार - मर्यादा, प्रेम और भक्ति के प्रतीक

श्री राम दरबार / श्री राधा कृष्ण दरबार में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण और राधा राणी की पूजा होती है।

श्री राम दरबार मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्शों, न्याय, धर्म और सत्य का प्रतीक है। भगवान राम त्रेता युग के अवतार हैं जिन्होंने धर्म की स्थापना के लिए अनेक कष्ट सहे। उनका जीवन आदर्श पुत्र, आदर्श पति, आदर्श भाई और आदर्श राजा के रूप में प्रेरणा देता है। रामायण में वर्णित उनके चरित्र से हमें जीवन जीने की सही राह मिलती है। राम दरबार की पूजा से न्याय की प्राप्ति, पारिवारिक एकता, धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा और जीवन में शांति मिलती है। भक्तजन यहाँ अपने कानूनी मामलों, पारिवारिक विवादों और न्याय की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

श्री राधा कृष्ण दरबार प्रेम, भक्ति और आनंद का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण और राधा राणी का दरबार हमें निष्काम प्रेम, माधुर्य भक्ति और जीवन में आनंद का संदेश देता है। श्रीकृष्ण का बाल्य से लेकर गीता उपदेश तक का चरित्र भक्तों को धर्म, कर्तव्य और भक्ति का मार्ग दिखाता है। राधा राणी के साथ उनका दिव्य मिलन शुद्ध प्रेम और भक्ति का सर्वोच्च स्वरूप माना जाता है। राधा-कृष्ण दरबार की पूजा से हृदय में शांति, दांपत्य जीवन में सामंजस्य और भक्ति में गहराई प्राप्त होती है।

राम दरबार में तुलसी दल, फूल, प्रसाद और पान के पत्ते चढ़ाए जाते हैं, वहीं राधा कृष्ण दरबार में तुलसी, माखन-मिश्री और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। मंगलवार और शनिवार को राम दरबार में विशेष आरती होती है, जबकि राधा कृष्ण दरबार में विशेषकर एकादशी और जन्माष्टमी पर भव्य उत्सव मनाया जाता है।

"रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई - राम दरबार में सत्य और धर्म की सदा विजय होती है"
खाटू श्याम जी

श्री खाटू श्यामजी - कलियुग के साक्षात भगवान

श्री खाटू श्यामजी, जिन्हें कलियुग के श्रीकृष्ण कहा जाता है, भक्तों के लिए अटूट आस्था, प्रेम, और शरणागति का प्रतीक हैं। इनका मूल नाम बार्बरीक था, जो भीम के पुत्र घटोत्कच और नाग कन्या आहिलावती के पुत्र थे।

महाभारत युद्ध के समय जब बार्बरीक ने युद्ध देखने की इच्छा जताई, तो श्रीकृष्ण ने उनसे प्रश्न किया कि वे किस पक्ष की सहायता करेंगे। बार्बरीक ने उत्तर दिया कि वे हारने वाले पक्ष की सहायता करेंगे। यह सुनकर श्रीकृष्ण समझ गए कि इससे युद्ध का संतुलन बिगड़ जाएगा।

श्रीकृष्ण ने दान में उनका शीश मांगा, जिसे बार्बरीक ने बिना हिचकिचाहट के अर्पित कर दिया। इस महान बलिदान से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में वे श्याम नाम से पूजे जाएंगे और जो भक्त सच्चे मन से उन्हें याद करेगा, उसकी हर मुराद पूरी होगी।

"हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा - जो भी दर पे तेरे आता है, श्याम, खाली नहीं वो जाता है"

राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गाँव में स्थित उनका मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है। फाल्गुन मेले के दौरान देश-विदेश से श्रद्धालु पैदल चलकर बाबा के दरबार में हाज़िरी लगाते हैं।

सालासर बालाजी

श्री सालासर बालाजी - आस्था और चमत्कार के प्रतीक

श्री सालासर बालाजी को हनुमान जी का विशेष रूप माना जाता है। राजस्थान के चुरू जिले के सालासर नगर में स्थित इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहाँ विराजमान हनुमान जी की मूर्ति दाढ़ी और मूंछों वाली है, जो उन्हें एक विलक्षण रूप प्रदान करती है।

इस मंदिर की स्थापना का इतिहास चमत्कारी घटनाओं से भरा है। सन 1754 (संवत 1811) में एक किसान जब अपने खेत में हल चला रहा था, तभी उसे भूमि के नीचे से हनुमान जी की मूर्ति प्राप्त हुई। मूर्ति को निकालते ही अद्भुत चमत्कार घटित होने लगे।

इस अद्भुत मूर्ति को महात्मा मोहनदास जी के मार्गदर्शन में सालासर में स्थापित किया गया। आज यह मंदिर भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र है। दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु यहां मनोकामना पूर्ति, कष्टों से मुक्ति, शारीरिक एवं मानसिक रोगों से आराम तथा तांत्रिक प्रभावों से सुरक्षा हेतु आते हैं।

यहां चूरमे के लड्डू, सिंदूर, नारियल आदि श्री बालाजी को अर्पित किए जाते हैं। हनुमान जयंती और नवरात्रि मेलों के दौरान यह स्थान लाखों भक्तों की भीड़ से भर जाता है।

"सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद श्री बालाजी जरूर पूरी करते हैं"
श्री शिव परिवार

श्री शिव परिवार - आदि दंपति और शक्ति के स्वामी

भगवान शिव और माता पार्वती का युग्म आदि दंपति के रूप में पूजा जाता है। भगवान शिव त्रिमूर्ति के संहारकर्ता हैं जबकि माता पार्वती आदि शक्ति हैं। दोनों मिलकर सृष्टि के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भगवान शिव योगियों के आदि गुरु हैं और तपस्या, त्याग तथा वैराग्य के प्रतीक हैं। वे नटराज के रूप में सृष्टि का नृत्य करते हैं और महाकाल के रूप में समय के स्वामी हैं। माता पार्वती शक्ति, ममता और करुणा की देवी हैं।

शिव-पार्वती की पूजा से वैवाहिक जीवन में सुख, संतान प्राप्ति, आध्यात्मिक शक्ति, मानसिक शांति और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है। अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इनकी पूजा करती हैं।

यहाँ शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग चढ़ाई जाती है। माता पार्वती को लाल फूल, सिंदूर और चुनरी अर्पित की जाती है। सोमवार और प्रदोष व्रत के दिन विशेष पूजा होती है।

"ॐ नमः शिवाय - शिव-पार्वती का आशीर्वाद जीवन को पूर्णता प्रदान करता है"

पंचदेव उपासना का महत्व और लाभ

पाँचो देवताओं की एक साथ उपासना से जीवन के सभी क्षेत्रों में संपूर्णता और दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है

संपूर्ण आध्यात्मिक विकास

पंचदेव की उपासना से आत्मा की शुद्धता, आध्यात्मिक चेतना का विकास और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

धन-संपत्ति और समृद्धि

व्यापार, नौकरी और जीवन के सभी कार्यों में सफलता, धन-संपत्ति की वृद्धि और आर्थिक स्थिरता मिलती है।

स्वास्थ्य और दीर्घायु

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार, रोगों से मुक्ति और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।

पारिवारिक सुख और एकता

घर में शांति, प्रेम, सद्भावना का वातावरण और पारिवारिक रिश्तों में मधुरता आती है।

सुरक्षा और संरक्षण

सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों, बाधाओं, दुश्मनों और बुरी नजर से पूर्ण सुरक्षा मिलती है।

ज्ञान, बुद्धि और सफलता

विद्या, बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि, सही निर्णय लेने की क्षमता और जीवन में सफलता प्राप्त होती है।

न्याय और मनोकामना पूर्ति

कानूनी मामलों में न्याय, सभी मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में संतुष्टि मिलती है।

वैवाहिक सुख और संतान प्राप्ति

अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति, वैवाहिक जीवन में खुशी और स्वस्थ संतान का आशीर्वाद मिलता है।