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पंचदेव मंदिर - एक पवित्र धाम

पाँच परम पूजनीय देवताओं का दिव्य निवास - जहां आस्था, भक्ति और चमत्कार का संगम होता है। खाटू श्याम, सालासर हनुमान, राणी सती दादी, राम दरबार और श्री शिव परिवार की कृपा से भक्तों को आत्मिक शांति और दिव्य अनुभव प्राप्त होता है।

(स्व.) श्रीमती कौशल्या देवी अग्रवाल

श्रीमती कौशल्या देवी, राणी सती दादी को बहुत मानती थीं और गहरी भक्ति करती थीं। वह प्रतिदिन मंदिर जाती थीं चाहे मौसम कैसा भी हो। आँधी हो, तूफान हो या रास्ते में पानी भरा हो, उनका यह नियम कभी नहीं टूटा।

गाय को रोटी दिए बिना वे खुद खाना नहीं खाती थीं।

वह हमारे जीवन में एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं और आज भी निभा रही हैं। वह शारीरिक रूप से हमारे साथ नहीं हैं, पर ऐसा कभी नहीं लगता कि वह हमारे बीच नहीं हैं। हमें पूरा विश्वास है कि हमारे हर काम उनकी आशीर्वाद से ही पूरे होते हैं।

श्रीमती कौशल्या देवी बहुत ही मिलनसार और खुशमिजाज थीं। वह दूसरों के दुख को अपना समझती थीं। हमने जीवन के अधिकतर मूल्य उनसे ही सीखे हैं।

वह हमेशा सबके लिए अच्छा सोचती थीं और कभी किसी के लिए बुरा नहीं चाहा। उनका स्वभाव इतना शांत था कि उन्होंने कभी किसी से झगड़ा नहीं किया।

उन्हें दिखावा बिल्कुल पसंद नहीं था। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन सादगी से जिया।

बहुत संघर्षों के बीच उन्होंने अपने बच्चों का पालन-पोषण किया। पूरे परिवार का उनसे गहरा जुड़ाव था। वह हर सदस्य के दुख-दर्द को अपना समझकर सहानुभूति देती थीं।

वह भले ही लौकिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, किंतु उनके द्वारा दिए गए मूल्य और संस्कार इस तरह हमारे भीतर रच-बस गए हैं कि कभी भी यह अनुभव नहीं होता कि वह हमारे साथ नहीं हैं।

पंचदेव मंदिर

समर्पित ट्रस्टीगण

KDACT - कौशल्या देवी अग्रवाल चैरिटेबल ट्रस्ट के समर्पित सदस्य

श्री रामस्वरूप अग्रवाल

वरिष्ठ ट्रस्टी

मंडावा, राजस्थान

सरलता और सेवा के प्रतीक। हार्डवेयर व्यवसाय में सक्रिय। परिवार के आध्यात्मिक स्तंभ। विनम्रता और सेवा भाव के लिए प्रसिद्ध।

श्री सूर्य प्रकाश अग्रवाल

मुख्य ट्रस्टी एवं संस्थापक

मंडावा, राजस्थान

सिद्धि विनायक इंडस्ट्रीज के संस्थापक। ₹5 करोड़ की भूमि दान कर मंदिर निर्माण का स्वप्न साकार किया। 2003 से निरंतर सेवा में संलग्न।

श्रीमती नेहा सूर्य प्रकाश अग्रवाल

ट्रस्टी सदस्या

सीकर, राजस्थान

B.Com स्नातक। कला और शिल्प में निपुण। पति की सफलता की मूक प्रेरणा। समर्पण और धैर्य की प्रतिमूर्ति।

श्री चंद्र प्रकाश अग्रवाल

ट्रस्टी सदस्य

मंडावा, राजस्थान

पारिवारिक व्यवसाय में सक्रिय। शांत स्वभाव और संतुलित दृष्टिकोण के धनी। स्थिरता और आत्मिक संतुलन के प्रतीक।

श्रीमती अमिता अग्रवाल

ट्रस्टी सदस्या

मारवाड़ी परिवार

B.A. स्नातक, ऑनलाइन गणित शिक्षिका। रामायण और गीता की नियमित अध्ययनकर्ता। धर्म, शिक्षा और सेवा की त्रिवेणी।

पंचदेव मंदिर

पंचदेव ट्रस्ट

पंचदेव ट्रस्ट का उद्देश्य सभी भक्तों को एक पवित्र और शांत वातावरण प्रदान करना है जहाँ वे सच्चे मन से पूजा-अर्चना कर सकें। यह ट्रस्ट समाज सेवा, धार्मिक आयोजन और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक जागरूकता फैलाने का कार्य कर रहा है।

यहाँ प्रतिदिन आरती, विशेष पूजन, यज्ञ और पर्व-त्योहारों पर भव्य आयोजन किए जाते हैं। ट्रस्ट द्वारा जरूरतमंदों की सहायता, अन्नदान, वस्त्रदान और शिक्षा हेतु कई सामाजिक पहल की जाती हैं, जिससे समाज में सेवा और सहयोग की भावना मजबूत होती है।

पंचदेव ट्रस्ट यह विश्वास दिलाता है कि श्रद्धा और भक्ति से किया गया प्रत्येक कार्य ईश्वर तक अवश्य पहुँचता है। ट्रस्ट सभी श्रद्धालुओं को आमंत्रित करता है कि वे इस सेवा और भक्ति के कार्य में सहभागी बनें और ईश्वर की अनुकम्पा प्राप्त करें।

हमारा प्रयास है कि पंचदेव मंदिर सिर्फ एक पूजा स्थल न रहकर समाज में संस्कार, सेवा और भक्ति का केंद्र बने, जहाँ हर कोई समान भाव से जुड़ सके और दिव्यता का अनुभव कर सके।

समर्पित ट्रस्टी सदस्य

पंचदेव ट्रस्ट

श्री संजय जालान

ट्रस्टी सदस्य

जयपुर, राजस्थान

जालान ग्रुप ऑफ कंपनीज के प्रबंध निदेशक। 25+ वर्षों का व्यापारिक अनुभव। समाज सेवा में गहरी रुचि। मंदिर विकास परियोजनाओं में सक्रिय योगदान।

श्री रवि केडिया

ट्रस्टी सदस्य

कोलकाता, पश्चिम बंगाल

केडिया ग्रुप के अध्यक्ष। धार्मिक संस्थानों को 15+ वर्षों से समर्थन। शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान। मंदिर प्रबंधन में विशेषज्ञता।

श्रीमती नेहा सूर्य प्रकाश अग्रवाल

ट्रस्टी सदस्या

सीकर, राजस्थान

B.Com स्नातक। कला और शिल्प में निपुण। पति की सफलता की मूक प्रेरणा। समर्पण और धैर्य की प्रतिमूर्ति। मंदिर के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रमुख संयोजक।

श्री सूर्य प्रकाश अग्रवाल

मुख्य ट्रस्टी एवं संस्थापक

मंडावा, राजस्थान

सिद्धि विनायक इंडस्ट्रीज के संस्थापक। ₹5 करोड़ की भूमि दान कर मंदिर निर्माण का स्वप्न साकार किया। 2003 से निरंतर सेवा में संलग्न। 50+ धार्मिक परियोजनाओं के प्रणेता।

श्री स्वर्गीय सुरेश कुमार मोदी

ट्रस्टी सदस्य

दिल्ली

मोदी एंटरप्राइजेज के संचालक। 30 वर्षों से अधिक का व्यवसायिक अनुभव। धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी। मंदिर के वित्तीय प्रबंधन में विशेष योगदान।

श्री कपिल कानोडिया

ट्रस्टी सदस्य

हिसार, हरियाणा

कानोडिया फाउंडेशन के ट्रस्टी। शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में 10+ वर्षों का अनुभव। युवाओं को धार्मिक मूल्यों से जोड़ने की पहल। मंदिर के शैक्षणिक कार्यक्रमों के संयोजक।

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पंचदेव मंदिर का महत्व और विशेषता

पंचदेव मंदिर एक प्रतिष्ठित हिंदू मंदिर है, जो पाँच परम पूजनीय देवताओं को समर्पित है। यह मंदिर हिंदू धर्म की समृद्ध परंपरा और आध्यात्मिक विरासत का अनूठा प्रतीक है। लवाछा, वापी में स्थित यह पवित्र स्थान श्री सूर्य प्रकाश अग्रवाल जी और उनके परिवार के अथक प्रयासों से स्थापित किया गया है।

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ पाँच अलग-अलग देवताओं की एक साथ उपासना होती है, जो भक्तों को संपूर्ण आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है। यहाँ विराजमान पाँच देवता हैं:

  • राणीसती दादी
  • सालासर हनुमान
  • खाटू श्याम
  • राम दरबार
  • श्री शिव परिवार

इस पवित्र स्थान पर आने वाले भक्तजन न केवल दर्शन का लाभ उठाते हैं, बल्कि जीवन की सभी समस्याओं का समाधान भी पाते हैं। पंचदेव की उपासना से भक्तों को शांति, समृद्धि, स्वास्थ्य, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक केंद्र भी है जहां विभिन्न त्योहार, भजन संध्या, और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। KDACT ट्रस्ट के तत्वावधान में संचालित यह मंदिर समाज सेवा और आध्यात्मिक जागरूकता का केंद्र है।

खाटू श्याम जी
राणी सती दादी

श्री राणी सती दादी - शक्ति और सतीत्व की देवी

श्री राणी सती दादी सतीत्व, पवित्रता और नारी शक्ति की प्रतीक हैं। राजस्थान के झुंझुनू जिले में स्थित इनका मुख्य मंदिर करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है। राणी सती दादी का वास्तविक नाम नारायणी देवी था।

इनके पति तन धन दास अग्रवाल एक व्यापारी थे। जब वे व्यापार के लिए दिल्ली गए तो वहाँ डकैतों ने उनकी हत्या कर दी। जब यह दुखद समाचार घर पहुंचा तो नारायणी देवी ने अपने पति के साथ सती होने का निर्णय लिया।

सती होते समय उन्होंने अपने भक्तों को वरदान दिया कि जो भी सच्चे मन से उनकी पूजा करेगा, उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी, परिवार में सुख-शांति आएगी और धन-संपत्ति की वृद्धि होगी

राणी सती दादी की पूजा विशेष रूप से महिलाओं द्वारा की जाती है। वे अपने पति की लंबी आयु, संतान की प्राप्ति, और पारिवारिक सुख के लिए दादी जी से प्रार्थना करती हैं। यहाँ चुनरी, सिंदूर, मिठाई और फूल चढ़ाए जाते हैं।

"माता राणी सती दादी सभी भक्तों की रक्षा करती हैं और उनके घर में सुख-समृद्धि लाती हैं"
सालासर बालाजी

श्री सालासर बालाजी - आस्था और चमत्कार के प्रतीक

श्री सालासर बालाजी को हनुमान जी का विशेष रूप माना जाता है। राजस्थान के चुरू जिले के सालासर नगर में स्थित इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहाँ विराजमान हनुमान जी की मूर्ति दाढ़ी और मूंछों वाली है, जो उन्हें एक विलक्षण रूप प्रदान करती है।

इस मंदिर की स्थापना का इतिहास चमत्कारी घटनाओं से भरा है। सन 1754 (संवत 1811) में एक किसान जब अपने खेत में हल चला रहा था, तभी उसे भूमि के नीचे से हनुमान जी की मूर्ति प्राप्त हुई। मूर्ति को निकालते ही अद्भुत चमत्कार घटित होने लगे।

इस अद्भुत मूर्ति को महात्मा मोहनदास जी के मार्गदर्शन में सालासर में स्थापित किया गया। आज यह मंदिर भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र है। दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु यहां मनोकामना पूर्ति, कष्टों से मुक्ति, शारीरिक एवं मानसिक रोगों से आराम तथा तांत्रिक प्रभावों से सुरक्षा हेतु आते हैं।

यहां चूरमे के लड्डू, सिंदूर, नारियल आदि श्री बालाजी को अर्पित किए जाते हैं। हनुमान जयंती और नवरात्रि मेलों के दौरान यह स्थान लाखों भक्तों की भीड़ से भर जाता है।

"सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद श्री बालाजी जरूर पूरी करते हैं"
खाटू श्याम जी

श्री खाटू श्यामजी - कलियुग के साक्षात भगवान

श्री खाटू श्यामजी, जिन्हें कलियुग के श्रीकृष्ण कहा जाता है, भक्तों के लिए अटूट आस्था, प्रेम, और शरणागति का प्रतीक हैं। इनका मूल नाम बार्बरीक था, जो भीम के पुत्र घटोत्कच और नाग कन्या आहिलावती के पुत्र थे।

महाभारत युद्ध के समय जब बार्बरीक ने युद्ध देखने की इच्छा जताई, तो श्रीकृष्ण ने उनसे प्रश्न किया कि वे किस पक्ष की सहायता करेंगे। बार्बरीक ने उत्तर दिया कि वे हारने वाले पक्ष की सहायता करेंगे। यह सुनकर श्रीकृष्ण समझ गए कि इससे युद्ध का संतुलन बिगड़ जाएगा।

श्रीकृष्ण ने दान में उनका शीश मांगा, जिसे बार्बरीक ने बिना हिचकिचाहट के अर्पित कर दिया। इस महान बलिदान से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में वे श्याम नाम से पूजे जाएंगे और जो भक्त सच्चे मन से उन्हें याद करेगा, उसकी हर मुराद पूरी होगी।

"हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा - जो भी दर पे तेरे आता है, श्याम, खाली नहीं वो जाता है"

राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गाँव में स्थित उनका मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है। फाल्गुन मेले के दौरान देश-विदेश से श्रद्धालु पैदल चलकर बाबा के दरबार में हाज़िरी लगाते हैं।

राम दरबार

श्री राम दरबार / श्री राधा कृष्ण दरबार - मर्यादा और न्याय के प्रतीक

श्री राम दरबार / श्री राधा कृष्ण दरबार में भगवान श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी की पूजा एक साथ होती है। यह दरबार मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्शों, न्याय, धर्म और सत्य का प्रतीक है।

भगवान राम त्रेता युग के अवतार हैं जिन्होंने धर्म की स्थापना के लिए अनेक कष्ट सहे। उनका जीवन आदर्श पुत्र, आदर्श पति, आदर्श भाई और आदर्श राजा के रूप में प्रेरणा देता है। रामायण में वर्णित उनके चरित्र से हमें जीवन जीने की सही राह मिलती है।

राम दरबार की पूजा से न्याय की प्राप्ति, पारिवारिक एकता, धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा और जीवन में शांति मिलती है। भक्तजन यहाँ अपने कानूनी मामलों, पारिवारिक विवादों और न्याय की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

राम दरबार में तुलसी दल, फूल, प्रसाद और पान के पत्ते चढ़ाए जाते हैं। मंगलवार और शनिवार को विशेष आरती होती है। रामनवमी के दिन यहाँ भव्य उत्सव मनाया जाता है।

"रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई - राम दरबार में सत्य और धर्म की सदा विजय होती है"
श्री शिव परिवार

श्री शिव परिवार - आदि दंपति और शक्ति के स्वामी

भगवान शिव और माता पार्वती का युग्म आदि दंपति के रूप में पूजा जाता है। भगवान शिव त्रिमूर्ति के संहारकर्ता हैं जबकि माता पार्वती आदि शक्ति हैं। दोनों मिलकर सृष्टि के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भगवान शिव योगियों के आदि गुरु हैं और तपस्या, त्याग तथा वैराग्य के प्रतीक हैं। वे नटराज के रूप में सृष्टि का नृत्य करते हैं और महाकाल के रूप में समय के स्वामी हैं। माता पार्वती शक्ति, ममता और करुणा की देवी हैं।

शिव-पार्वती की पूजा से वैवाहिक जीवन में सुख, संतान प्राप्ति, आध्यात्मिक शक्ति, मानसिक शांति और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है। अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इनकी पूजा करती हैं।

यहाँ शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग चढ़ाई जाती है। माता पार्वती को लाल फूल, सिंदूर और चुनरी अर्पित की जाती है। सोमवार और प्रदोष व्रत के दिन विशेष पूजा होती है।

"ॐ नमः शिवाय - शिव-पार्वती का आशीर्वाद जीवन को पूर्णता प्रदान करता है"

पंचदेव उपासना का महत्व और लाभ

पाँचो देवताओं की एक साथ उपासना से जीवन के सभी क्षेत्रों में संपूर्णता और दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है

संपूर्ण आध्यात्मिक विकास

पंचदेव की उपासना से आत्मा की शुद्धता, आध्यात्मिक चेतना का विकास और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

धन-संपत्ति और समृद्धि

व्यापार, नौकरी और जीवन के सभी कार्यों में सफलता, धन-संपत्ति की वृद्धि और आर्थिक स्थिरता मिलती है।

स्वास्थ्य और दीर्घायु

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार, रोगों से मुक्ति और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।

पारिवारिक सुख और एकता

घर में शांति, प्रेम, सद्भावना का वातावरण और पारिवारिक रिश्तों में मधुरता आती है।

सुरक्षा और संरक्षण

सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों, बाधाओं, दुश्मनों और बुरी नजर से पूर्ण सुरक्षा मिलती है।

ज्ञान, बुद्धि और सफलता

विद्या, बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि, सही निर्णय लेने की क्षमता और जीवन में सफलता प्राप्त होती है।

न्याय और मनोकामना पूर्ति

कानूनी मामलों में न्याय, सभी मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में संतुष्टि मिलती है।

वैवाहिक सुख और संतान प्राप्ति

अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति, वैवाहिक जीवन में खुशी और स्वस्थ संतान का आशीर्वाद मिलता है।